Thursday, 29 July 2021

पक्षियों को दाना

 


पक्षियों को दाना

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वैसे तो पक्षियों को हमेशा दाना डाला जा सकता है।

कुछ लोग तो इसे अपनी दिनचर्या में भी शामिल कर लेते हैं।

कई लोगों के लिए ये शगल हो जाता है, लोगों को इसमें 

आनंद, सुकून मिलता है।

सावन माह में हर छत पर दाने डालने का चलन आम है,

और बहुत पुराना भी है।इसके पीछे का कारण भी

तार्किक आधार पर खरा उतरता है।

गर्मियों में फसल कटने के बाद खेतों में बिखरे दाने,

पक्षियों के पेट भरने के काम आते हैं।लेकिन बरसात के 

मौसम में खेतों के बिखरे एवं बोये गए अनाज के दाने 

अंकुरित हो जाते हैं, तथा फसल आने में भी समय रहता है।

 ऐसी स्थिति में पक्षियों को भोजन की समस्या हो सकती है।

इसलिए, इस महीने मे दाने डालने का पुराना चलन है।

 आप भी अपने छत, घर के आंगन, या बरामदे में

एक दो मुठ्ठी दाने बिखेर दीजिए और कीजिए इंतजार

पक्षियों के आने का।

Sunday, 25 July 2021

Olympic 2020

 



ओलंपिक 2020 का टोक्यो में आगाज हो गया है।

33 खेलों के 330 इवेंट्स में से भारतीय खिलाड़ी 84 इवेंट्स में शामिल हो रहे है। भारत से 119 खिलाड़ी/एथलीट टोक्यो पहुंचे हैं।

भारत के पदक जीतने की शुरुआत हो चुकी है।वेट लिफ्टिंग मे मीरा बाई चानू ने रजत पदक दिलाया है।

मीरा बाई चानू का बचपन से तीरंदाज़ बनने का सपना था।स्कूली समय में कक्षा आठवीं की एक किताब में कुंजूरानी देवी के बारे में पढ़कर इन्होंने ठान लिया कि, वेट लिफ्टिंग को लक्ष्य बनाना है।अपने लक्ष्य को हासिल करने चानू ने खूब मेहनत की, और सफलता मिली।

मीराबाई चानू ओलंपिक में मेडल जीतने वालीं भारत की दूसरी वेटलिफ्टर बन गई हैं. उन्होंने टोक्यो ओलंपिक 2020 में 49 किग्रा वर्ग में रजत पदक जीता। मीराबाई चानू से पहले 2000 के सिडनी ओलंपिक में कर्णम मल्लेश्वरी ‌ने कांस्य पदक जीता था ।

उम्मीद है कि, हमारे खिलाड़ी खूब सारे पदकों के साथ देश लौटेंगे।


Saturday, 24 July 2021

डायबिटीज़


डायबिटीज़

डायबिटीज विकराल समस्या बनती जा रही है। ‍विश्व स्‍वास्‍थ्‍य संगठन के सर्वेक्षण के अनुसार वर्ष 2025 तक भारत में दुनिया के सबसे अधिक, लगभग पॉंच करोड, सत्‍तर लाख मधुमेह रोगी होंगे। 

रक्त मे शुगर लेवल ज्यादा हो जाने की स्थिति डायबिटीज या मधुमेह कहलाती है।हमारे रक्त मे शुगर होना आवश्यक है। ब्लड शुगर ऊर्जा का प्रमुख स्रोत होता है और उस आहार से आता है जिसका सेवन किया जाता है। शरीर में इंसुलिन नामक एक हार्मोन होता है जो ग्लूकोज को कोशिकाओं में जाने में मदद करता है ताकि ऊर्जा प्रदान की जा सके। 

हमारे रक्त में खाली पेट सामान्य शुगर लेवल 70 से 100 एमजी के बीच हो सकता है। 126 mg से ज्यादा शुगर स्तर आने पर डायबिटिक का खतरा माना जाता है। 

भूख और प्यास में वृद्धि, बार-बार पेशाब आना, मुंह सूखना, वजन में कमी या थकान होना, सिरदर्द , चिड़चिड़ापन, घाव धीरे-धीरे ठीक होना, धुंधली दृष्टि, मतली, त्वचा में संक्रमण , हाथ पैर में झुनझुनी या सुन्नता इसके प्रारंभिक लक्षण हो सकते हैं।

हमे रक्त में ग्लूकोज लेबल ठीक रखने के लिए प्रयास करना चाहिए, कभी भूखे न रहें। डायबिटीज से बचने के लिए सुबह नियमित टहलना चाहिए। रात में चावल खाने से बचना चाहिए। जिन चीजों में कार्बोहाइड्रेट की मात्रा ज्यादा होती है, उन चीजों को अपने आहार में कम मात्रा में ही शामिल करना चाहिए।फल, सलाद और फाइबर युक्त चीजों को अपने आहार में शामिल करना चाहिए।रात का भोजन करने के बाद कुछ देर टहलना जरूर चाहिए क्योंकि ऐसा करने से शुगर लेवल बढ़ने से रोकता है। 


Friday, 23 July 2021

रोड़ के डॉक्टर



रोड़ के डॉक्टर

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समाज सेवा का अनूठा जुनून।

 "कटनम" जैसे लोगों से ही ये दुनिया कायम है।

हैदराबाद के रहने वाले गंगाधर तिलक कटनम और 

वेंकटेश्वरी कटनम नामक बुजुर्ग दंपती एक मिसाल है। 

रेलवे से रिटायरमेंट के बाद वे हैदराबाद रहने लगे,

वहां कटनम ने देखा कि रोड़ के गड्डों के कारण, कई

दुर्घटनाएं होती रहती हैं।इसके बाद उन्होंने गड्डो को भरना ही,

 अपना एकमात्र काम मान लिया।

वे रोज अपनी पत्नी के साथ, कार से निकलते हैं और,

जहां भी सड़क पर गड्ढा मिलता, उसे तत्काल भर देते हैं।

शहर के लोग इनको रोड़ का डॉक्टर कहते हैं और,

इनकी कार को रोड़ की एम्बुलेंस।

वे अब तक सड़कों पर पिछले 11 सालों में 2030 गड्ढों को 

भर चुके है, जिसके लिए वे अब तक 40 लाख रुपये खर्च 

कर चुके हैं। इस काम के लिए वे अपने पेंशन के पैसों का उपयोग करते हैं।


सलाम _ शुक्रिया


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Wednesday, 23 June 2021

चुंबकीय शक्ति/ magnetic power



 चुंबकीय शक्ति

(Magnetic power)

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आजकल ऐसी बहुत सारी खबरें सोशल मीडिया पर

सर्कुलेट हो रही है कि वैक्सीन लेने के बाद कुछ लोगों में

चुंबकीय शक्ति पैदा हो गई है। उनके शरीर से चम्मच, थाली, सिक्के चिपकने लगे हैं।

गौर से देखने पर आप पायेंगे कि ये सब बर्तन लोहे के

न होकर स्टेनलेस स्टील के हैं।और ये वस्तुएं कपड़े के ऊपर से न चिपका कर सीधे त्वचा पर चिपकी हुई है।

ये वस्तुएं शरीर पर ऐसे स्थान चिपकी हुई है जहां पर

बाल नही है अथवा बहुत ही कम है।

मानव शरीर से हमेशा कुछ न कुछ मात्रा में 

पसीना निकलता रहता है। सामान्यतः ये सूखता रहता है।

कभी कभी उमस भरे दिनों में पसीना बहुत अधिक महसूस

होता है। त्वचा चिपचिपी सी लगती है।

त्वचा पर कोई चिकनी सतह की वस्तु रखने पर 

चिपक जाती है।केवल लोहा ही नहीं, स्टील, प्लास्टिक, सिक्के, मोबाइल आदि भी चिपक जाते हैं।

अगर हम त्वचा पर टेलकम पाउडर लगा दें, या

कपड़े पहने हुए कुछ चिपकाएंगे तो कोई वस्तु नही 

चिपक सकती।

कुल मिलाकर ये एक भ्रम है कि शरीर में वैक्सीन लेने से

मैग्नेटिक पावर पैदा हो गई है।

Monday, 21 June 2021

इंफोडेमिक

 


इंफोडेमिक (infodemic)


गलत सूचनाओं को फैलाना, 

बिना सत्यता जानें या परीक्षण किए, कोई संदेश

शेयर, फॉरवर्ड, या लाईक कर देना इंफोडेमिक है।

ये पेंडेमिक से भी घातक है।

किसी के द्वारा भेजा गया एक गलत मैसेज

कितना नुकसान कर सकता है इसकी कल्पना भी नहीं

की जा सकती है। हर व्यक्ति सोशल मीडिया पर

हजारों व्यक्तियों से जुड़ा हुआ है और हजारों, लाखों करोड़ो से।

मैसेज फैलने की गति, संक्रमण फैलने की गति से

कई गुना ज्यादा है। किसी बीमारी के संबंध में

एक गलत किसी के जीवन को प्रभावित कर सकती है।

किसी घटना का वीडियो दो समुदायों में मनमुटाव और

संघर्ष की स्थिति पैदा कर सकता है।

हम सबकी सूझबूझ से ये रोका जा सकता है, बस

हमे संदेश को बिना परखे सर्कुलेट करने से बचना है।

प्रयास कीजिए, 

सोशल मीडिया का सदुपयोग हो।🙏


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प्लेटलेट्स कम होना

 


थ्रोम्बोसायटोपनिया 


रक्त में प्लेटलेट्स की कमी को थ्रोम्बोसायटोपनिया कहते हैं।प्लेटलेट्स रक्त का आवश्यक अवयव है।ये कोशिकीय संरचनाऐं रक्त में स्वतंत्र रूप प्रवाहित होती है, जो रक्त का थक्का बनाने का काम करती है। रक्त वाहिकाओं के कटने या क्षतिग्रस्त होने पर ये तत्काल उस स्थान पर पहुंच कर रक्त को बहने से रोकती हैं।

सामान्यतः किसी भी स्वस्थ व्यक्ति के रक्त मे प्रति माइक्रो लीटर 1.5 से 5 लाख तक प्लेटलेट्स काउंट होती हैं। इनके कम हो जाने से रक्त का थक्का बनने में समस्या हो सकती है और रक्त देर तक बहता रहता है।प्लेटलेट्स कम होने पर ऐसे कार्यों से बचना चाहिए जिससे चोट लगने का खतरा हो।

50 हजार प्लेटलेट्स प्रति माइक्रो लीटर से कम होने पर खतरा ज्यादा रहता है। ऐसी स्थिति में नाक, मसूड़ों से खून आ सकता है या कभी कभी त्वचा पर खून जमने के निशान मिल सकते हैं।

डेंगू, मलेरिया के अतिरिक्त प्लेटलेट्स कम होने के ये कारण भी हो सकते हैं जैसे कोई जन्मजात (जेनेटिक) विकार, बोनमेरो डिजीज या डिसफंक्शन, बढ़ा हुआ स्प्लीन, नियमित शराब पीना, दवाओं या ट्रीटमेंट का साइड इफेक्ट, और गर्भावस्था ।

प्लेटलेट्स 8 से 10 दिन तक कार्यशील रहती है इसके बाद ये स्वतः नष्ट हो जाती हैं और नई प्लेटलेट्स उनकी जगह ले लेती है यही प्रक्रम चलता रहता है।आमतौर पर शरीर इनकी संख्या का संतुलन बनाए रखता है।लेकिन किसी समस्या के कारण इनकी संख्या लगातार गिरती है तो उपचार बहुत आवश्यक हो जाता है। कभी कभी स्प्लीन ज्यादा मात्रा में प्लेटलेट्स नष्ट करने लगता है ऐसी स्थिति में , स्प्लीन को सर्जरी करके हटा दिया जाता है ।प्लेटलेट्स बढ़ाने के लिए प्लेटलेट्स ट्रांसफ्यूजन भी किया जाता है जिसमे बाहर से व्यक्ति को प्लेटलेट्स चढ़ाए जाते हैं।

प्लेटलेट्स कम होने के लक्षण महसूस होने पर तत्काल

चिकित्सक से परामर्श उपरान्त उपचार लेना चाहिए। घरेलू उपायों में पपीता, चुकंदर, कीवी और पालक का सेवन लाभदायक माना जाता है।

Saturday, 19 June 2021

बिच्छू scorpion

 


बिच्छू

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आम धारणा है कि, 

काले रंग के बिच्छू, सबसे ज्यादा घातक होते हैं।

वैज्ञानिक अध्ययनों से सामने आया है कि, 

लाल रंग के बिच्छू काले रंग के बिच्छू से ज्यादा 

जहरीला जहर रखते हैं।

दुनिया में बिच्छुओं की 2000 से ज्यादा प्रजातियां हैं,

जिनमे केवल 25 प्रजातियां ही घातक है।

बिच्छू पत्थरों के नीचे, झाड़ियों में छिपे होते हैं।

बिच्छू बरसात के मौसम में बच्चों को जन्म देते हैं।

पानी से बचने के लिए सूखे स्थान की तलाश में,

बिच्छू इधर उधर घूमते रहते हैं।

सामान्यतः बिच्छू रात में सक्रिय होते हैं।अपने भोजन में, 

ये छोटे कीड़े मकोड़े खाते हैं।

आमतौर पर ये मनुष्यों को दंश नही मारते।किंतु अपनी

आत्मरक्षा में काट लेते हैं।इसका जहर असहनीय पीड़ा

देता है और कभी कभी घातक भी हो सकता है।

बिच्छू के काटने पर चिकित्सक से परामर्श लेना चाहिए।

प्राथमिक उपचार में फिटकरी का लेप उस स्थान पर 

लगाने की सलाह कुछ लोग देते हैं। काटे गए स्थान को हृदय के लेवल से नीचा रखना चाहिए,जिससे रक्त देरी से हृदय तक

 पहुंचे।एवं पीड़ित व्यक्ति को तत्काल अस्पताल लेकर जाना चाहिए।

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Thursday, 17 June 2021

छिपकली (Lizard)



 घरेलू छिपकली

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छिपकली कीट पतंगे खाने वाला एक सरीसृप है।

ये अपने भोजन से ही पानी अवशोषित कर लेता है,

इसे बाहर से पानी की कम आवश्यकता होती है।

ये ठंडे रक्त का प्राणी है, ज्यादा सर्दी में इसके शरीर का

 तापमान बहुत कम हो जाता है जिससे इनकी मृत्यु तक

हो जाती है।ठंडे मौसम में ये धूप या बल्ब के पास रहना 

पसंद करते हैं।

छिपकली के शरीर में जहर नही होता है।

इसलिए इसके काटने से मृत्यु की संभावना नहीं रहती।

कभी कभी छिपकली भोजन पकाते समय बर्तनों में

गिर जाती है, उस भोजन को खा लेने से फूड प्वाइजनिंग

हो सकती है।

कुछ लोगों के संदर्भ में इंटरनेट पर सूचना मिलती है कि,

वे छिपकली खाते हैं।इससे स्पष्ट होता है कि, ये जीव

बिल्कुल भी जहरीला नही होता।

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Tuesday, 15 June 2021

गोह गोहरा (monitor lizard)


गोह/गोयरा (monitor lizard)
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गोह या गोयरा छिपकली के समान एक सरीसृप है।
इसके संबंध में जनमानस में बहुत भ्रांतियां फैली हुई है।
लोगो को लगता है कि ये बहुत अधिक जहरीला होता है,
इसके काटने से व्यक्ति की तत्काल मृत्यु हो जाती है।
और अगर ये फूंक मार दे तो व्यक्ति अंधा हो सकता है।
जबकि ये जीव जरा भी जहरीला नही होता है।
अपनी आत्मरक्षा में ये काटता जरूर है लेकिन इसके काटने
से व्यक्ति की मृत्यु होना बिल्कुल भी संभव नही है।
अगर इसके काटने से किसी की मृत्यु हुई है तो
संभावना है कि डर से उसको हृदयाघात हुआ होगा।
ये जीव पक्षियों के अंडे, मेंढक, चूहे, एवं सड़ा गला मांस
खाता है,जिससे इसकेे दांतो मे बैक्टीरिया अधिक हो सकते हैं।
किसी को काटने पर उस स्थान पर संक्रमण हो सकता है।
काटे गए वाले स्थान पर त्वचा को एंटीबैक्टीरियल लोशन,
डेटॉल आदि से धोना चाहिए।साथ ही संक्रमण से बचने के लिए
चिकित्सक से परामर्श एवं उपचार भी जरूरी है।
डर पीड़ित व्यक्ति को कमजोर करता है, डर से घबराहट,
रक्त प्रवाह तेज हो जाता है, जिससे जीवन संकट में पड़ सकता है।
सही जानकारी इसी डर को दूर करती है।

#suresh

Saturday, 12 June 2021

नेवर गूगल सिमटम्स (never Google symptoms)


 

बीमारियों के सिमटम्स से बीमारी का खुद अंदाजा न
लगाएं। और न ही गूगल से अपने मर्ज के लक्षणों से
बीमारी या उसका उपचार खोजें।
इंटरनेट आपको, बुखार सर्च करने पर टाइफाइड के लक्षण,सर्दी या मौसमी फ्लू होने पर कोरोना के,
खांसी खोजने पर टीबी, और सरदर्द को  खोजने पर
ब्रेन ट्यूमर के लक्षण बता सकता है।
इंटरनेट पर सटीक जानकारी मिलना सम्भव नहीं। कई बीमारियों में लक्षण समान हो सकते हैं।बुखार, सरदर्द,
थकान तो सबसे सामान्य लक्षण हैं।90% बीमारियों में
ये लक्षण मिल सकते हैं। इसलिये बिना चिकित्सक के द्वारा
जांचें किसी भी निष्कर्ष पर पहुंचना कतई उचित नही।
ये अकारण ही चिंता और दुख का कारण बनता है।
इसलिए, हमेशा उचित जांच उपरांत ही कोई उपचार लें।

#Suresh

Tuesday, 8 June 2021

ऑक्सीमीटर oximeter


 

ऑक्सीमीटर

हम सबको न जाने कितनी बार
ऑक्सीजन की क्षणिक कमी हुई होगी।
दौड़ते समय, व्यायाम करते समय या फिर
रक्त में हीमोग्लोबिन की अल्पता होने से।
बस उस समय हमने खुद का ऑक्सिजन स्थायित्व
प्रतिशत जानने ऑक्सीमीटर का उपयोग नही किया था।
अब सबके हाथों में ये यंत्र है।लेकिन इसके प्रयोग मे
कुछ बातें हमेशा ध्यान रखना बहुत जरूरी है।
हाथ साफ़ हो। उंगलियो में नेल पॉलिश या कोई रंग न हो।
हाथ बहुत ठंडे न हो।इससे रीडिंग प्रभावित होती है।
अगर रीडिंग में ऑक्सीजन का प्रतिशत कम हो तो,
कुछ देर बाद पुनः चेक करें। मास्क लगा हो तो मास्क
निकाल कर थोड़ी देर से फिर प्रयास करें।
ऑक्सीमीटर की बैटरी कमजोर होने पर भी यह
गलत रीड कर सकती है।
कितने ही वीडियो सोशल मीडिया पर सर्कुलेट किए गए
जो ऑक्सीमीटर की एक्यूरेसी पर प्रश्न चिन्ह लगाते हैं।
सबको सरसरी तौर पर सच नही माना जा सकता।
लेकिन परीक्षण आवश्यक है। इसलिए अपने निष्कर्ष को
ही सही न मानें।चिकित्सक से परामर्श अवश्य ही लें।
एवं परामर्श अनुसार उपचार लें।

रोग भ्रम Hypochondria


 हाइपोकॉन्ड्रिया (रोग भ्रम)


स्वास्थ्य की चिंता करना स्वाभाविक है, किंतु कुछ लोगों में

यह चिंता रोगभ्रम को जन्म दे देती है।व्यक्ति अकारण ही

अपने भीतर किसी बीमारी के लक्षण महसूस करने लगता है।

व्यक्ति को बीमार पड़ जाने का लगातार डर बना रहता है, जबकि मेडिकल जांचों में कुछ नहीं मिलता है, कभी कभी तो व्यक्ति इन जांचों पर भी संदेह करने लगता है, यही रोगभ्रम (हाइपोकॉन्ड्रिया)  विकार के लक्षण हैं।

लगातार बीमारी की खबरें देखना। सोशल मीडिया पर

किसी बीमारी के संदेश खूब वायरल होना। या इंटरनेट पर

बीमारी के संबंध में सर्च करते रहना, इसके कारण हो सकते हैं।

मौसमी बीमारियां सदैव चलती रहती है।बिना जांच कोई

संदेह न पालें।अपना ध्यान उन खबरों से हटाने का प्रयास करें, जिनसे आपको अनावश्यक फिक्र होती है।


बुखार fever


 

बुखार

बुखार कोई बीमारी न होकर,
शरीर में होने वाली किसी समस्या का संकेत है।
सर्दी जुकाम, टाइफाइड, कोई चोट या घाव, या फिर
कोई वैक्सीन लेने पर हमें अक्सर बुखार आता है।
मतलब बहुत सीधा है कि शरीर किसी संक्रमण से
लड़ रहा है। उस संक्रमण के कारक से युद्ध चल रहा है।
देखा जाए तो, ये शरीर के लिए बहुत जरूरी है।
हम अधिकांश मौकों पर जल्दी से पेरासिटामोल
ले लेते हैं और शरीर को बीमारी से लड़ने नही देते हैं।
शरीर का अपना प्रतिरक्षा तंत्र है, वह संक्रमण से
बचने के लिए तापमान में वृद्धि करता है।
शरीर में ज्यादा तापमान होने पर सूक्ष्मजीव की वृद्धि
रुक जाती है।उनका विघटन होने लगता है।
बहुत तेज बुखार न हो तो एंटी पायरेटिक दवा लेने के
स्थान पर, पानी की पट्टी शरीर पर रखना अच्छा माना
जाता है।
शरीर का तापमान 100° फेरनहाइट होने पर ही
आमतौर पर लोग घबरा जाते हैं, जबकि यह तापमान
सामान्य तापमान (98.6°f) से लगभग 1.4° ही ज्यादा
होता है।
बचपन से बुखार सबको आता रहा है, इसके लिए
चिंता के स्थान पर सही उपचार की जरूरत होती है।
आखिर ये बुखार भी  एकदम पिछले सालों के बुखार
जैसा ही तो है।


प्लेसिबो इफैक्ट Placebo effect


 

प्लेसिबो इफैक्ट


विश्वास बड़ी बात है।

इससे आत्मविश्वास पैदा होता है।

बीमार को तंदुरुस्त होने के लिए ये बहुत जरुरी है।

अमुक डॉक्टर के उपचार से या,

अमुक दवा से ठीक होने का विश्वास रोगी में 

रोग से लड़ने की क्षमता बढ़ा देता है।

प्लेसिबो इफैक्ट का भी यही मूल मंत्र है।

मन को यह भरोसा दिला देना कि उसे दवा दे दी गई है,

जबकि वह दवा नहीं होती।अन्य खाद्य पदार्थ होता है।

यह मरीज के भीतर रोग प्रतिरोधक क्षमता बढ़ा देता है

और कई मामलों में मरीज ठीक हो जाते है।

हर मामले में ये कारगर साबित नही है, पर इसके पीछे का

आधार हर बीमार से लड़ने के लिए महत्वपूर्ण है।

- हिम्मत हमेशा एंटीबॉडीज बढ़ाती है।


इम्युनिटी immunity

 


एक रिपोर्ट के अनुसार शरीर में

सांस लेने, भोजन पानी, आदि कारणों से

करोड़ो की संख्या में वायरस पहुंचते हैं।

उनमें से ज्यादातर स्वास्थ्य के लिए घातक नही होते।

जो नुकसानदेह होते हैं उनसे शरीर लड़ता रहता है।

मानव शरीर अधिकांश सूक्ष्म जीवों से लड़ने में सक्षम है।

इसे यूं समझा जा सकता है कि, कोई वैक्सीन लेने पर

रोग के खिलाफ एंटीबॉडी तो शरीर ही बनाता है। जब

वैक्सीन द्वारा किसी रोग के मृत या कमजोर वायरस 

शरीर को दिए जाते हैं।

इसलिए, अपने इम्यून सिस्टम को मजबूत कीजिए।

इससे कई संक्रमणों से आसानी से बचा जा सकता है।

प्रातः खुली हवा लीजिए। कुछ देर टहलिये।

 जितना हो सके मौसमी फल सब्जी का उपयोग करें। संभव हो तो कुछ देर धूप जरूर लें।

ज्यादा समय तक समाचार न देखे, पढ़े। 

परिजनों, मित्रों से बात करे।पसंदीदा फिल्म देखें, संगीत सुनें। इम्यूनिटी जरूर मजबूत होगी।


Suresh

ब्लैक फंगस (black fungus)

 ब्लैक फंगस


फंगस किसी के लिए भी नई चीज नही है।

हर कोई इससे पहले से ही परिचित है।

इसके स्पोर्स स्वतंत्र रूप से हवा में मौजूद रहते हैं।

नमी वाले स्थानों पर, नर्म खाद्य पदार्थों पर, ये स्पोर्स

चिपक कर वृद्धि करने लगते हैं।

सामान्यतः मनुष्यों को कम संक्रमित करते हैं, लेकिन

जिनमे इम्युनिटी कमजोर होती है या, जो लंबे समय तक

बाहरी ऑक्सीजन सपोर्ट, आईसीयू में रहे हो, उनको

इससे संक्रमित होने का खतरा होता है।इसमें नाक, आंख

मस्तिष्क प्रभावित होता है।ये एक से दूसरे को नही फैलती।

सामान्य स्थिति में 1 लाख व्यक्तियों में से एक व्यक्ति इससे

प्रभावित होता है और ऑक्सीजन सपोर्ट पर रहे,

1 हजार व्यक्तियों में 4/5 व्यक्तियों को खतरा होता है।

एक औसत स्वस्थ आदमी को इसके संक्रमण का बहुत 

कम खतरा होता है।लेकिन सुरक्षा बहुत आवश्यक है।

बंद कमरों की खिड़कियां खुली रखे। बाहरी हवा को 

आने जाने दें। गीला, नमी युक्त मास्क कभी न पहनें।

रोज 10/15 मिनिट हल्की धूप में जरूर टहलें।

चेहरे के किसी भाग पर दर्द या सूजन महसूस हो तो

चिकित्सक से परामर्श लें।


Suresh jadav


सर्पदंश (snakebite)


 सर्पदंश

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मानसून की आमद होने ही वाली है। बारिश के दौरान सर्पदंश की घटनाएं भी ज्यादा सामने आती हैं। बारिश का पानी सांपों के बिल में भर जाता है और वे इधर उधर घूमने लगते हैं। सूखे स्थान की खोज में वे घरों बगीचों की ओर बढ़ते हैं।

दुनिया भर में सांपों की जितनी प्रजाति पाई जाती है उनमें से लगभग 5 प्रतिशत ही जहरीले होते हैं। कई बार विषहीन सांप के काटने के कारण भी लोग मर जाते है। संभवतः उनमें डर से हृदयाघात हो जाता है।इसलिए सांप की पहचान जरुरी है।

सर्पदंश के निशान को देखकर सांप के जहरीले होने की जानकारी मिल सकती है। अगर काटे गए स्थान पर केवल 2 दांतो के निशान मिले तो ये जहरीले सांप द्वारा काटे जाने के संकेत हैं, दो से अधिक दांतों के निशान विषहीन सांप की पहचान होती है।

अगर किसी को सर्प काट ले तो इस व्यक्ति को खुली हवा में रखे, साथ ही काटे गए स्थान से कुछ ऊपर कपड़े से बांध दें, इससे रक्त संचार कम हो जायेगा। जितनी जल्दी हो सके, उस व्यक्ति को उपचार हेतु अस्पताल ले जाना चाहिए। झाड़ फूंक मे समय बेकार करने से रोगी के जीवन को खतरा बढ़ता जाता है।

सांप भोजन चबाते नही सीधे निगल जाते हैं।ये लंबे समय तक भूखे रह सकते हैं।साल भर में एक बार खाकर भी जीवित रह सकते हैं।सांप दूध नही पीते, ये दूध को पानी समझकर पी जाते हैं जिससे इनको नुकसान होता है और सांप मर भी जाते हैं।

सांप पीछा करके नही काट सकते क्योंकि इनकी गति 7/8 किमी प्रति घंटा होती है। इसलिए इसे देखकर घबराने की जरूरत नहीं है।

मानसून के दौरान सतर्क रहें।घास आदि पर नंगे पांव न टहले। जूतों को सदैव उनके भीतर देखने के बाद ही पहनें। अगर किसी को जहरीला सांप काट ले तो तत्काल नजदीकी अस्पताल लेकर जाएं।


#snakebite

पक्षियों को दाना

  पक्षियों को दाना . वैसे तो पक्षियों को हमेशा दाना डाला जा सकता है। कुछ लोग तो इसे अपनी दिनचर्या में भी शामिल कर लेते हैं। कई लोगों के लिए ...