बिच्छू
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आम धारणा है कि,
काले रंग के बिच्छू, सबसे ज्यादा घातक होते हैं।
वैज्ञानिक अध्ययनों से सामने आया है कि,
लाल रंग के बिच्छू काले रंग के बिच्छू से ज्यादा
जहरीला जहर रखते हैं।
दुनिया में बिच्छुओं की 2000 से ज्यादा प्रजातियां हैं,
जिनमे केवल 25 प्रजातियां ही घातक है।
बिच्छू पत्थरों के नीचे, झाड़ियों में छिपे होते हैं।
बिच्छू बरसात के मौसम में बच्चों को जन्म देते हैं।
पानी से बचने के लिए सूखे स्थान की तलाश में,
बिच्छू इधर उधर घूमते रहते हैं।
सामान्यतः बिच्छू रात में सक्रिय होते हैं।अपने भोजन में,
ये छोटे कीड़े मकोड़े खाते हैं।
आमतौर पर ये मनुष्यों को दंश नही मारते।किंतु अपनी
आत्मरक्षा में काट लेते हैं।इसका जहर असहनीय पीड़ा
देता है और कभी कभी घातक भी हो सकता है।
बिच्छू के काटने पर चिकित्सक से परामर्श लेना चाहिए।
प्राथमिक उपचार में फिटकरी का लेप उस स्थान पर
लगाने की सलाह कुछ लोग देते हैं। काटे गए स्थान को हृदय के लेवल से नीचा रखना चाहिए,जिससे रक्त देरी से हृदय तक
पहुंचे।एवं पीड़ित व्यक्ति को तत्काल अस्पताल लेकर जाना चाहिए।
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