ऑक्सीमीटर
हम सबको न जाने कितनी बार
ऑक्सीजन की क्षणिक कमी हुई होगी।
दौड़ते समय, व्यायाम करते समय या फिर
रक्त में हीमोग्लोबिन की अल्पता होने से।
बस उस समय हमने खुद का ऑक्सिजन स्थायित्व
प्रतिशत जानने ऑक्सीमीटर का उपयोग नही किया था।
अब सबके हाथों में ये यंत्र है।लेकिन इसके प्रयोग मे
कुछ बातें हमेशा ध्यान रखना बहुत जरूरी है।
हाथ साफ़ हो। उंगलियो में नेल पॉलिश या कोई रंग न हो।
हाथ बहुत ठंडे न हो।इससे रीडिंग प्रभावित होती है।
अगर रीडिंग में ऑक्सीजन का प्रतिशत कम हो तो,
कुछ देर बाद पुनः चेक करें। मास्क लगा हो तो मास्क
निकाल कर थोड़ी देर से फिर प्रयास करें।
ऑक्सीमीटर की बैटरी कमजोर होने पर भी यह
गलत रीड कर सकती है।
कितने ही वीडियो सोशल मीडिया पर सर्कुलेट किए गए
जो ऑक्सीमीटर की एक्यूरेसी पर प्रश्न चिन्ह लगाते हैं।
सबको सरसरी तौर पर सच नही माना जा सकता।
लेकिन परीक्षण आवश्यक है। इसलिए अपने निष्कर्ष को
ही सही न मानें।चिकित्सक से परामर्श अवश्य ही लें।
एवं परामर्श अनुसार उपचार लें।





