Monday, 21 June 2021

इंफोडेमिक

 


इंफोडेमिक (infodemic)


गलत सूचनाओं को फैलाना, 

बिना सत्यता जानें या परीक्षण किए, कोई संदेश

शेयर, फॉरवर्ड, या लाईक कर देना इंफोडेमिक है।

ये पेंडेमिक से भी घातक है।

किसी के द्वारा भेजा गया एक गलत मैसेज

कितना नुकसान कर सकता है इसकी कल्पना भी नहीं

की जा सकती है। हर व्यक्ति सोशल मीडिया पर

हजारों व्यक्तियों से जुड़ा हुआ है और हजारों, लाखों करोड़ो से।

मैसेज फैलने की गति, संक्रमण फैलने की गति से

कई गुना ज्यादा है। किसी बीमारी के संबंध में

एक गलत किसी के जीवन को प्रभावित कर सकती है।

किसी घटना का वीडियो दो समुदायों में मनमुटाव और

संघर्ष की स्थिति पैदा कर सकता है।

हम सबकी सूझबूझ से ये रोका जा सकता है, बस

हमे संदेश को बिना परखे सर्कुलेट करने से बचना है।

प्रयास कीजिए, 

सोशल मीडिया का सदुपयोग हो।🙏


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प्लेटलेट्स कम होना

 


थ्रोम्बोसायटोपनिया 


रक्त में प्लेटलेट्स की कमी को थ्रोम्बोसायटोपनिया कहते हैं।प्लेटलेट्स रक्त का आवश्यक अवयव है।ये कोशिकीय संरचनाऐं रक्त में स्वतंत्र रूप प्रवाहित होती है, जो रक्त का थक्का बनाने का काम करती है। रक्त वाहिकाओं के कटने या क्षतिग्रस्त होने पर ये तत्काल उस स्थान पर पहुंच कर रक्त को बहने से रोकती हैं।

सामान्यतः किसी भी स्वस्थ व्यक्ति के रक्त मे प्रति माइक्रो लीटर 1.5 से 5 लाख तक प्लेटलेट्स काउंट होती हैं। इनके कम हो जाने से रक्त का थक्का बनने में समस्या हो सकती है और रक्त देर तक बहता रहता है।प्लेटलेट्स कम होने पर ऐसे कार्यों से बचना चाहिए जिससे चोट लगने का खतरा हो।

50 हजार प्लेटलेट्स प्रति माइक्रो लीटर से कम होने पर खतरा ज्यादा रहता है। ऐसी स्थिति में नाक, मसूड़ों से खून आ सकता है या कभी कभी त्वचा पर खून जमने के निशान मिल सकते हैं।

डेंगू, मलेरिया के अतिरिक्त प्लेटलेट्स कम होने के ये कारण भी हो सकते हैं जैसे कोई जन्मजात (जेनेटिक) विकार, बोनमेरो डिजीज या डिसफंक्शन, बढ़ा हुआ स्प्लीन, नियमित शराब पीना, दवाओं या ट्रीटमेंट का साइड इफेक्ट, और गर्भावस्था ।

प्लेटलेट्स 8 से 10 दिन तक कार्यशील रहती है इसके बाद ये स्वतः नष्ट हो जाती हैं और नई प्लेटलेट्स उनकी जगह ले लेती है यही प्रक्रम चलता रहता है।आमतौर पर शरीर इनकी संख्या का संतुलन बनाए रखता है।लेकिन किसी समस्या के कारण इनकी संख्या लगातार गिरती है तो उपचार बहुत आवश्यक हो जाता है। कभी कभी स्प्लीन ज्यादा मात्रा में प्लेटलेट्स नष्ट करने लगता है ऐसी स्थिति में , स्प्लीन को सर्जरी करके हटा दिया जाता है ।प्लेटलेट्स बढ़ाने के लिए प्लेटलेट्स ट्रांसफ्यूजन भी किया जाता है जिसमे बाहर से व्यक्ति को प्लेटलेट्स चढ़ाए जाते हैं।

प्लेटलेट्स कम होने के लक्षण महसूस होने पर तत्काल

चिकित्सक से परामर्श उपरान्त उपचार लेना चाहिए। घरेलू उपायों में पपीता, चुकंदर, कीवी और पालक का सेवन लाभदायक माना जाता है।

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