Saturday, 24 July 2021

डायबिटीज़


डायबिटीज़

डायबिटीज विकराल समस्या बनती जा रही है। ‍विश्व स्‍वास्‍थ्‍य संगठन के सर्वेक्षण के अनुसार वर्ष 2025 तक भारत में दुनिया के सबसे अधिक, लगभग पॉंच करोड, सत्‍तर लाख मधुमेह रोगी होंगे। 

रक्त मे शुगर लेवल ज्यादा हो जाने की स्थिति डायबिटीज या मधुमेह कहलाती है।हमारे रक्त मे शुगर होना आवश्यक है। ब्लड शुगर ऊर्जा का प्रमुख स्रोत होता है और उस आहार से आता है जिसका सेवन किया जाता है। शरीर में इंसुलिन नामक एक हार्मोन होता है जो ग्लूकोज को कोशिकाओं में जाने में मदद करता है ताकि ऊर्जा प्रदान की जा सके। 

हमारे रक्त में खाली पेट सामान्य शुगर लेवल 70 से 100 एमजी के बीच हो सकता है। 126 mg से ज्यादा शुगर स्तर आने पर डायबिटिक का खतरा माना जाता है। 

भूख और प्यास में वृद्धि, बार-बार पेशाब आना, मुंह सूखना, वजन में कमी या थकान होना, सिरदर्द , चिड़चिड़ापन, घाव धीरे-धीरे ठीक होना, धुंधली दृष्टि, मतली, त्वचा में संक्रमण , हाथ पैर में झुनझुनी या सुन्नता इसके प्रारंभिक लक्षण हो सकते हैं।

हमे रक्त में ग्लूकोज लेबल ठीक रखने के लिए प्रयास करना चाहिए, कभी भूखे न रहें। डायबिटीज से बचने के लिए सुबह नियमित टहलना चाहिए। रात में चावल खाने से बचना चाहिए। जिन चीजों में कार्बोहाइड्रेट की मात्रा ज्यादा होती है, उन चीजों को अपने आहार में कम मात्रा में ही शामिल करना चाहिए।फल, सलाद और फाइबर युक्त चीजों को अपने आहार में शामिल करना चाहिए।रात का भोजन करने के बाद कुछ देर टहलना जरूर चाहिए क्योंकि ऐसा करने से शुगर लेवल बढ़ने से रोकता है। 


Friday, 23 July 2021

रोड़ के डॉक्टर



रोड़ के डॉक्टर

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समाज सेवा का अनूठा जुनून।

 "कटनम" जैसे लोगों से ही ये दुनिया कायम है।

हैदराबाद के रहने वाले गंगाधर तिलक कटनम और 

वेंकटेश्वरी कटनम नामक बुजुर्ग दंपती एक मिसाल है। 

रेलवे से रिटायरमेंट के बाद वे हैदराबाद रहने लगे,

वहां कटनम ने देखा कि रोड़ के गड्डों के कारण, कई

दुर्घटनाएं होती रहती हैं।इसके बाद उन्होंने गड्डो को भरना ही,

 अपना एकमात्र काम मान लिया।

वे रोज अपनी पत्नी के साथ, कार से निकलते हैं और,

जहां भी सड़क पर गड्ढा मिलता, उसे तत्काल भर देते हैं।

शहर के लोग इनको रोड़ का डॉक्टर कहते हैं और,

इनकी कार को रोड़ की एम्बुलेंस।

वे अब तक सड़कों पर पिछले 11 सालों में 2030 गड्ढों को 

भर चुके है, जिसके लिए वे अब तक 40 लाख रुपये खर्च 

कर चुके हैं। इस काम के लिए वे अपने पेंशन के पैसों का उपयोग करते हैं।


सलाम _ शुक्रिया


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Wednesday, 23 June 2021

चुंबकीय शक्ति/ magnetic power



 चुंबकीय शक्ति

(Magnetic power)

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आजकल ऐसी बहुत सारी खबरें सोशल मीडिया पर

सर्कुलेट हो रही है कि वैक्सीन लेने के बाद कुछ लोगों में

चुंबकीय शक्ति पैदा हो गई है। उनके शरीर से चम्मच, थाली, सिक्के चिपकने लगे हैं।

गौर से देखने पर आप पायेंगे कि ये सब बर्तन लोहे के

न होकर स्टेनलेस स्टील के हैं।और ये वस्तुएं कपड़े के ऊपर से न चिपका कर सीधे त्वचा पर चिपकी हुई है।

ये वस्तुएं शरीर पर ऐसे स्थान चिपकी हुई है जहां पर

बाल नही है अथवा बहुत ही कम है।

मानव शरीर से हमेशा कुछ न कुछ मात्रा में 

पसीना निकलता रहता है। सामान्यतः ये सूखता रहता है।

कभी कभी उमस भरे दिनों में पसीना बहुत अधिक महसूस

होता है। त्वचा चिपचिपी सी लगती है।

त्वचा पर कोई चिकनी सतह की वस्तु रखने पर 

चिपक जाती है।केवल लोहा ही नहीं, स्टील, प्लास्टिक, सिक्के, मोबाइल आदि भी चिपक जाते हैं।

अगर हम त्वचा पर टेलकम पाउडर लगा दें, या

कपड़े पहने हुए कुछ चिपकाएंगे तो कोई वस्तु नही 

चिपक सकती।

कुल मिलाकर ये एक भ्रम है कि शरीर में वैक्सीन लेने से

मैग्नेटिक पावर पैदा हो गई है।

Monday, 21 June 2021

इंफोडेमिक

 


इंफोडेमिक (infodemic)


गलत सूचनाओं को फैलाना, 

बिना सत्यता जानें या परीक्षण किए, कोई संदेश

शेयर, फॉरवर्ड, या लाईक कर देना इंफोडेमिक है।

ये पेंडेमिक से भी घातक है।

किसी के द्वारा भेजा गया एक गलत मैसेज

कितना नुकसान कर सकता है इसकी कल्पना भी नहीं

की जा सकती है। हर व्यक्ति सोशल मीडिया पर

हजारों व्यक्तियों से जुड़ा हुआ है और हजारों, लाखों करोड़ो से।

मैसेज फैलने की गति, संक्रमण फैलने की गति से

कई गुना ज्यादा है। किसी बीमारी के संबंध में

एक गलत किसी के जीवन को प्रभावित कर सकती है।

किसी घटना का वीडियो दो समुदायों में मनमुटाव और

संघर्ष की स्थिति पैदा कर सकता है।

हम सबकी सूझबूझ से ये रोका जा सकता है, बस

हमे संदेश को बिना परखे सर्कुलेट करने से बचना है।

प्रयास कीजिए, 

सोशल मीडिया का सदुपयोग हो।🙏


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प्लेटलेट्स कम होना

 


थ्रोम्बोसायटोपनिया 


रक्त में प्लेटलेट्स की कमी को थ्रोम्बोसायटोपनिया कहते हैं।प्लेटलेट्स रक्त का आवश्यक अवयव है।ये कोशिकीय संरचनाऐं रक्त में स्वतंत्र रूप प्रवाहित होती है, जो रक्त का थक्का बनाने का काम करती है। रक्त वाहिकाओं के कटने या क्षतिग्रस्त होने पर ये तत्काल उस स्थान पर पहुंच कर रक्त को बहने से रोकती हैं।

सामान्यतः किसी भी स्वस्थ व्यक्ति के रक्त मे प्रति माइक्रो लीटर 1.5 से 5 लाख तक प्लेटलेट्स काउंट होती हैं। इनके कम हो जाने से रक्त का थक्का बनने में समस्या हो सकती है और रक्त देर तक बहता रहता है।प्लेटलेट्स कम होने पर ऐसे कार्यों से बचना चाहिए जिससे चोट लगने का खतरा हो।

50 हजार प्लेटलेट्स प्रति माइक्रो लीटर से कम होने पर खतरा ज्यादा रहता है। ऐसी स्थिति में नाक, मसूड़ों से खून आ सकता है या कभी कभी त्वचा पर खून जमने के निशान मिल सकते हैं।

डेंगू, मलेरिया के अतिरिक्त प्लेटलेट्स कम होने के ये कारण भी हो सकते हैं जैसे कोई जन्मजात (जेनेटिक) विकार, बोनमेरो डिजीज या डिसफंक्शन, बढ़ा हुआ स्प्लीन, नियमित शराब पीना, दवाओं या ट्रीटमेंट का साइड इफेक्ट, और गर्भावस्था ।

प्लेटलेट्स 8 से 10 दिन तक कार्यशील रहती है इसके बाद ये स्वतः नष्ट हो जाती हैं और नई प्लेटलेट्स उनकी जगह ले लेती है यही प्रक्रम चलता रहता है।आमतौर पर शरीर इनकी संख्या का संतुलन बनाए रखता है।लेकिन किसी समस्या के कारण इनकी संख्या लगातार गिरती है तो उपचार बहुत आवश्यक हो जाता है। कभी कभी स्प्लीन ज्यादा मात्रा में प्लेटलेट्स नष्ट करने लगता है ऐसी स्थिति में , स्प्लीन को सर्जरी करके हटा दिया जाता है ।प्लेटलेट्स बढ़ाने के लिए प्लेटलेट्स ट्रांसफ्यूजन भी किया जाता है जिसमे बाहर से व्यक्ति को प्लेटलेट्स चढ़ाए जाते हैं।

प्लेटलेट्स कम होने के लक्षण महसूस होने पर तत्काल

चिकित्सक से परामर्श उपरान्त उपचार लेना चाहिए। घरेलू उपायों में पपीता, चुकंदर, कीवी और पालक का सेवन लाभदायक माना जाता है।

Saturday, 19 June 2021

बिच्छू scorpion

 


बिच्छू

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आम धारणा है कि, 

काले रंग के बिच्छू, सबसे ज्यादा घातक होते हैं।

वैज्ञानिक अध्ययनों से सामने आया है कि, 

लाल रंग के बिच्छू काले रंग के बिच्छू से ज्यादा 

जहरीला जहर रखते हैं।

दुनिया में बिच्छुओं की 2000 से ज्यादा प्रजातियां हैं,

जिनमे केवल 25 प्रजातियां ही घातक है।

बिच्छू पत्थरों के नीचे, झाड़ियों में छिपे होते हैं।

बिच्छू बरसात के मौसम में बच्चों को जन्म देते हैं।

पानी से बचने के लिए सूखे स्थान की तलाश में,

बिच्छू इधर उधर घूमते रहते हैं।

सामान्यतः बिच्छू रात में सक्रिय होते हैं।अपने भोजन में, 

ये छोटे कीड़े मकोड़े खाते हैं।

आमतौर पर ये मनुष्यों को दंश नही मारते।किंतु अपनी

आत्मरक्षा में काट लेते हैं।इसका जहर असहनीय पीड़ा

देता है और कभी कभी घातक भी हो सकता है।

बिच्छू के काटने पर चिकित्सक से परामर्श लेना चाहिए।

प्राथमिक उपचार में फिटकरी का लेप उस स्थान पर 

लगाने की सलाह कुछ लोग देते हैं। काटे गए स्थान को हृदय के लेवल से नीचा रखना चाहिए,जिससे रक्त देरी से हृदय तक

 पहुंचे।एवं पीड़ित व्यक्ति को तत्काल अस्पताल लेकर जाना चाहिए।

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Thursday, 17 June 2021

छिपकली (Lizard)



 घरेलू छिपकली

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छिपकली कीट पतंगे खाने वाला एक सरीसृप है।

ये अपने भोजन से ही पानी अवशोषित कर लेता है,

इसे बाहर से पानी की कम आवश्यकता होती है।

ये ठंडे रक्त का प्राणी है, ज्यादा सर्दी में इसके शरीर का

 तापमान बहुत कम हो जाता है जिससे इनकी मृत्यु तक

हो जाती है।ठंडे मौसम में ये धूप या बल्ब के पास रहना 

पसंद करते हैं।

छिपकली के शरीर में जहर नही होता है।

इसलिए इसके काटने से मृत्यु की संभावना नहीं रहती।

कभी कभी छिपकली भोजन पकाते समय बर्तनों में

गिर जाती है, उस भोजन को खा लेने से फूड प्वाइजनिंग

हो सकती है।

कुछ लोगों के संदर्भ में इंटरनेट पर सूचना मिलती है कि,

वे छिपकली खाते हैं।इससे स्पष्ट होता है कि, ये जीव

बिल्कुल भी जहरीला नही होता।

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पक्षियों को दाना

  पक्षियों को दाना . वैसे तो पक्षियों को हमेशा दाना डाला जा सकता है। कुछ लोग तो इसे अपनी दिनचर्या में भी शामिल कर लेते हैं। कई लोगों के लिए ...