Saturday, 19 June 2021

बिच्छू scorpion

 


बिच्छू

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आम धारणा है कि, 

काले रंग के बिच्छू, सबसे ज्यादा घातक होते हैं।

वैज्ञानिक अध्ययनों से सामने आया है कि, 

लाल रंग के बिच्छू काले रंग के बिच्छू से ज्यादा 

जहरीला जहर रखते हैं।

दुनिया में बिच्छुओं की 2000 से ज्यादा प्रजातियां हैं,

जिनमे केवल 25 प्रजातियां ही घातक है।

बिच्छू पत्थरों के नीचे, झाड़ियों में छिपे होते हैं।

बिच्छू बरसात के मौसम में बच्चों को जन्म देते हैं।

पानी से बचने के लिए सूखे स्थान की तलाश में,

बिच्छू इधर उधर घूमते रहते हैं।

सामान्यतः बिच्छू रात में सक्रिय होते हैं।अपने भोजन में, 

ये छोटे कीड़े मकोड़े खाते हैं।

आमतौर पर ये मनुष्यों को दंश नही मारते।किंतु अपनी

आत्मरक्षा में काट लेते हैं।इसका जहर असहनीय पीड़ा

देता है और कभी कभी घातक भी हो सकता है।

बिच्छू के काटने पर चिकित्सक से परामर्श लेना चाहिए।

प्राथमिक उपचार में फिटकरी का लेप उस स्थान पर 

लगाने की सलाह कुछ लोग देते हैं। काटे गए स्थान को हृदय के लेवल से नीचा रखना चाहिए,जिससे रक्त देरी से हृदय तक

 पहुंचे।एवं पीड़ित व्यक्ति को तत्काल अस्पताल लेकर जाना चाहिए।

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Thursday, 17 June 2021

छिपकली (Lizard)



 घरेलू छिपकली

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छिपकली कीट पतंगे खाने वाला एक सरीसृप है।

ये अपने भोजन से ही पानी अवशोषित कर लेता है,

इसे बाहर से पानी की कम आवश्यकता होती है।

ये ठंडे रक्त का प्राणी है, ज्यादा सर्दी में इसके शरीर का

 तापमान बहुत कम हो जाता है जिससे इनकी मृत्यु तक

हो जाती है।ठंडे मौसम में ये धूप या बल्ब के पास रहना 

पसंद करते हैं।

छिपकली के शरीर में जहर नही होता है।

इसलिए इसके काटने से मृत्यु की संभावना नहीं रहती।

कभी कभी छिपकली भोजन पकाते समय बर्तनों में

गिर जाती है, उस भोजन को खा लेने से फूड प्वाइजनिंग

हो सकती है।

कुछ लोगों के संदर्भ में इंटरनेट पर सूचना मिलती है कि,

वे छिपकली खाते हैं।इससे स्पष्ट होता है कि, ये जीव

बिल्कुल भी जहरीला नही होता।

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Tuesday, 15 June 2021

गोह गोहरा (monitor lizard)


गोह/गोयरा (monitor lizard)
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गोह या गोयरा छिपकली के समान एक सरीसृप है।
इसके संबंध में जनमानस में बहुत भ्रांतियां फैली हुई है।
लोगो को लगता है कि ये बहुत अधिक जहरीला होता है,
इसके काटने से व्यक्ति की तत्काल मृत्यु हो जाती है।
और अगर ये फूंक मार दे तो व्यक्ति अंधा हो सकता है।
जबकि ये जीव जरा भी जहरीला नही होता है।
अपनी आत्मरक्षा में ये काटता जरूर है लेकिन इसके काटने
से व्यक्ति की मृत्यु होना बिल्कुल भी संभव नही है।
अगर इसके काटने से किसी की मृत्यु हुई है तो
संभावना है कि डर से उसको हृदयाघात हुआ होगा।
ये जीव पक्षियों के अंडे, मेंढक, चूहे, एवं सड़ा गला मांस
खाता है,जिससे इसकेे दांतो मे बैक्टीरिया अधिक हो सकते हैं।
किसी को काटने पर उस स्थान पर संक्रमण हो सकता है।
काटे गए वाले स्थान पर त्वचा को एंटीबैक्टीरियल लोशन,
डेटॉल आदि से धोना चाहिए।साथ ही संक्रमण से बचने के लिए
चिकित्सक से परामर्श एवं उपचार भी जरूरी है।
डर पीड़ित व्यक्ति को कमजोर करता है, डर से घबराहट,
रक्त प्रवाह तेज हो जाता है, जिससे जीवन संकट में पड़ सकता है।
सही जानकारी इसी डर को दूर करती है।

#suresh

Saturday, 12 June 2021

नेवर गूगल सिमटम्स (never Google symptoms)


 

बीमारियों के सिमटम्स से बीमारी का खुद अंदाजा न
लगाएं। और न ही गूगल से अपने मर्ज के लक्षणों से
बीमारी या उसका उपचार खोजें।
इंटरनेट आपको, बुखार सर्च करने पर टाइफाइड के लक्षण,सर्दी या मौसमी फ्लू होने पर कोरोना के,
खांसी खोजने पर टीबी, और सरदर्द को  खोजने पर
ब्रेन ट्यूमर के लक्षण बता सकता है।
इंटरनेट पर सटीक जानकारी मिलना सम्भव नहीं। कई बीमारियों में लक्षण समान हो सकते हैं।बुखार, सरदर्द,
थकान तो सबसे सामान्य लक्षण हैं।90% बीमारियों में
ये लक्षण मिल सकते हैं। इसलिये बिना चिकित्सक के द्वारा
जांचें किसी भी निष्कर्ष पर पहुंचना कतई उचित नही।
ये अकारण ही चिंता और दुख का कारण बनता है।
इसलिए, हमेशा उचित जांच उपरांत ही कोई उपचार लें।

#Suresh

Tuesday, 8 June 2021

ऑक्सीमीटर oximeter


 

ऑक्सीमीटर

हम सबको न जाने कितनी बार
ऑक्सीजन की क्षणिक कमी हुई होगी।
दौड़ते समय, व्यायाम करते समय या फिर
रक्त में हीमोग्लोबिन की अल्पता होने से।
बस उस समय हमने खुद का ऑक्सिजन स्थायित्व
प्रतिशत जानने ऑक्सीमीटर का उपयोग नही किया था।
अब सबके हाथों में ये यंत्र है।लेकिन इसके प्रयोग मे
कुछ बातें हमेशा ध्यान रखना बहुत जरूरी है।
हाथ साफ़ हो। उंगलियो में नेल पॉलिश या कोई रंग न हो।
हाथ बहुत ठंडे न हो।इससे रीडिंग प्रभावित होती है।
अगर रीडिंग में ऑक्सीजन का प्रतिशत कम हो तो,
कुछ देर बाद पुनः चेक करें। मास्क लगा हो तो मास्क
निकाल कर थोड़ी देर से फिर प्रयास करें।
ऑक्सीमीटर की बैटरी कमजोर होने पर भी यह
गलत रीड कर सकती है।
कितने ही वीडियो सोशल मीडिया पर सर्कुलेट किए गए
जो ऑक्सीमीटर की एक्यूरेसी पर प्रश्न चिन्ह लगाते हैं।
सबको सरसरी तौर पर सच नही माना जा सकता।
लेकिन परीक्षण आवश्यक है। इसलिए अपने निष्कर्ष को
ही सही न मानें।चिकित्सक से परामर्श अवश्य ही लें।
एवं परामर्श अनुसार उपचार लें।

रोग भ्रम Hypochondria


 हाइपोकॉन्ड्रिया (रोग भ्रम)


स्वास्थ्य की चिंता करना स्वाभाविक है, किंतु कुछ लोगों में

यह चिंता रोगभ्रम को जन्म दे देती है।व्यक्ति अकारण ही

अपने भीतर किसी बीमारी के लक्षण महसूस करने लगता है।

व्यक्ति को बीमार पड़ जाने का लगातार डर बना रहता है, जबकि मेडिकल जांचों में कुछ नहीं मिलता है, कभी कभी तो व्यक्ति इन जांचों पर भी संदेह करने लगता है, यही रोगभ्रम (हाइपोकॉन्ड्रिया)  विकार के लक्षण हैं।

लगातार बीमारी की खबरें देखना। सोशल मीडिया पर

किसी बीमारी के संदेश खूब वायरल होना। या इंटरनेट पर

बीमारी के संबंध में सर्च करते रहना, इसके कारण हो सकते हैं।

मौसमी बीमारियां सदैव चलती रहती है।बिना जांच कोई

संदेह न पालें।अपना ध्यान उन खबरों से हटाने का प्रयास करें, जिनसे आपको अनावश्यक फिक्र होती है।


बुखार fever


 

बुखार

बुखार कोई बीमारी न होकर,
शरीर में होने वाली किसी समस्या का संकेत है।
सर्दी जुकाम, टाइफाइड, कोई चोट या घाव, या फिर
कोई वैक्सीन लेने पर हमें अक्सर बुखार आता है।
मतलब बहुत सीधा है कि शरीर किसी संक्रमण से
लड़ रहा है। उस संक्रमण के कारक से युद्ध चल रहा है।
देखा जाए तो, ये शरीर के लिए बहुत जरूरी है।
हम अधिकांश मौकों पर जल्दी से पेरासिटामोल
ले लेते हैं और शरीर को बीमारी से लड़ने नही देते हैं।
शरीर का अपना प्रतिरक्षा तंत्र है, वह संक्रमण से
बचने के लिए तापमान में वृद्धि करता है।
शरीर में ज्यादा तापमान होने पर सूक्ष्मजीव की वृद्धि
रुक जाती है।उनका विघटन होने लगता है।
बहुत तेज बुखार न हो तो एंटी पायरेटिक दवा लेने के
स्थान पर, पानी की पट्टी शरीर पर रखना अच्छा माना
जाता है।
शरीर का तापमान 100° फेरनहाइट होने पर ही
आमतौर पर लोग घबरा जाते हैं, जबकि यह तापमान
सामान्य तापमान (98.6°f) से लगभग 1.4° ही ज्यादा
होता है।
बचपन से बुखार सबको आता रहा है, इसके लिए
चिंता के स्थान पर सही उपचार की जरूरत होती है।
आखिर ये बुखार भी  एकदम पिछले सालों के बुखार
जैसा ही तो है।


पक्षियों को दाना

  पक्षियों को दाना . वैसे तो पक्षियों को हमेशा दाना डाला जा सकता है। कुछ लोग तो इसे अपनी दिनचर्या में भी शामिल कर लेते हैं। कई लोगों के लिए ...