Tuesday, 15 June 2021
गोह गोहरा (monitor lizard)
Saturday, 12 June 2021
नेवर गूगल सिमटम्स (never Google symptoms)
बीमारियों के सिमटम्स से बीमारी का खुद अंदाजा न
लगाएं। और न ही गूगल से अपने मर्ज के लक्षणों से
बीमारी या उसका उपचार खोजें।
इंटरनेट आपको, बुखार सर्च करने पर टाइफाइड के लक्षण,सर्दी या मौसमी फ्लू होने पर कोरोना के,
खांसी खोजने पर टीबी, और सरदर्द को खोजने पर
ब्रेन ट्यूमर के लक्षण बता सकता है।
इंटरनेट पर सटीक जानकारी मिलना सम्भव नहीं। कई बीमारियों में लक्षण समान हो सकते हैं।बुखार, सरदर्द,
थकान तो सबसे सामान्य लक्षण हैं।90% बीमारियों में
ये लक्षण मिल सकते हैं। इसलिये बिना चिकित्सक के द्वारा
जांचें किसी भी निष्कर्ष पर पहुंचना कतई उचित नही।
ये अकारण ही चिंता और दुख का कारण बनता है।
इसलिए, हमेशा उचित जांच उपरांत ही कोई उपचार लें।
#Suresh
Tuesday, 8 June 2021
ऑक्सीमीटर oximeter
ऑक्सीमीटर
हम सबको न जाने कितनी बार
ऑक्सीजन की क्षणिक कमी हुई होगी।
दौड़ते समय, व्यायाम करते समय या फिर
रक्त में हीमोग्लोबिन की अल्पता होने से।
बस उस समय हमने खुद का ऑक्सिजन स्थायित्व
प्रतिशत जानने ऑक्सीमीटर का उपयोग नही किया था।
अब सबके हाथों में ये यंत्र है।लेकिन इसके प्रयोग मे
कुछ बातें हमेशा ध्यान रखना बहुत जरूरी है।
हाथ साफ़ हो। उंगलियो में नेल पॉलिश या कोई रंग न हो।
हाथ बहुत ठंडे न हो।इससे रीडिंग प्रभावित होती है।
अगर रीडिंग में ऑक्सीजन का प्रतिशत कम हो तो,
कुछ देर बाद पुनः चेक करें। मास्क लगा हो तो मास्क
निकाल कर थोड़ी देर से फिर प्रयास करें।
ऑक्सीमीटर की बैटरी कमजोर होने पर भी यह
गलत रीड कर सकती है।
कितने ही वीडियो सोशल मीडिया पर सर्कुलेट किए गए
जो ऑक्सीमीटर की एक्यूरेसी पर प्रश्न चिन्ह लगाते हैं।
सबको सरसरी तौर पर सच नही माना जा सकता।
लेकिन परीक्षण आवश्यक है। इसलिए अपने निष्कर्ष को
ही सही न मानें।चिकित्सक से परामर्श अवश्य ही लें।
एवं परामर्श अनुसार उपचार लें।
रोग भ्रम Hypochondria
हाइपोकॉन्ड्रिया (रोग भ्रम)
स्वास्थ्य की चिंता करना स्वाभाविक है, किंतु कुछ लोगों में
यह चिंता रोगभ्रम को जन्म दे देती है।व्यक्ति अकारण ही
अपने भीतर किसी बीमारी के लक्षण महसूस करने लगता है।
व्यक्ति को बीमार पड़ जाने का लगातार डर बना रहता है, जबकि मेडिकल जांचों में कुछ नहीं मिलता है, कभी कभी तो व्यक्ति इन जांचों पर भी संदेह करने लगता है, यही रोगभ्रम (हाइपोकॉन्ड्रिया) विकार के लक्षण हैं।
लगातार बीमारी की खबरें देखना। सोशल मीडिया पर
किसी बीमारी के संदेश खूब वायरल होना। या इंटरनेट पर
बीमारी के संबंध में सर्च करते रहना, इसके कारण हो सकते हैं।
मौसमी बीमारियां सदैव चलती रहती है।बिना जांच कोई
संदेह न पालें।अपना ध्यान उन खबरों से हटाने का प्रयास करें, जिनसे आपको अनावश्यक फिक्र होती है।
बुखार fever
बुखार
बुखार कोई बीमारी न होकर,
शरीर में होने वाली किसी समस्या का संकेत है।
सर्दी जुकाम, टाइफाइड, कोई चोट या घाव, या फिर
कोई वैक्सीन लेने पर हमें अक्सर बुखार आता है।
मतलब बहुत सीधा है कि शरीर किसी संक्रमण से
लड़ रहा है। उस संक्रमण के कारक से युद्ध चल रहा है।
देखा जाए तो, ये शरीर के लिए बहुत जरूरी है।
हम अधिकांश मौकों पर जल्दी से पेरासिटामोल
ले लेते हैं और शरीर को बीमारी से लड़ने नही देते हैं।
शरीर का अपना प्रतिरक्षा तंत्र है, वह संक्रमण से
बचने के लिए तापमान में वृद्धि करता है।
शरीर में ज्यादा तापमान होने पर सूक्ष्मजीव की वृद्धि
रुक जाती है।उनका विघटन होने लगता है।
बहुत तेज बुखार न हो तो एंटी पायरेटिक दवा लेने के
स्थान पर, पानी की पट्टी शरीर पर रखना अच्छा माना
जाता है।
शरीर का तापमान 100° फेरनहाइट होने पर ही
आमतौर पर लोग घबरा जाते हैं, जबकि यह तापमान
सामान्य तापमान (98.6°f) से लगभग 1.4° ही ज्यादा
होता है।
बचपन से बुखार सबको आता रहा है, इसके लिए
चिंता के स्थान पर सही उपचार की जरूरत होती है।
आखिर ये बुखार भी एकदम पिछले सालों के बुखार
जैसा ही तो है।
प्लेसिबो इफैक्ट Placebo effect
प्लेसिबो इफैक्ट
विश्वास बड़ी बात है।
इससे आत्मविश्वास पैदा होता है।
बीमार को तंदुरुस्त होने के लिए ये बहुत जरुरी है।
अमुक डॉक्टर के उपचार से या,
अमुक दवा से ठीक होने का विश्वास रोगी में
रोग से लड़ने की क्षमता बढ़ा देता है।
प्लेसिबो इफैक्ट का भी यही मूल मंत्र है।
मन को यह भरोसा दिला देना कि उसे दवा दे दी गई है,
जबकि वह दवा नहीं होती।अन्य खाद्य पदार्थ होता है।
यह मरीज के भीतर रोग प्रतिरोधक क्षमता बढ़ा देता है
और कई मामलों में मरीज ठीक हो जाते है।
हर मामले में ये कारगर साबित नही है, पर इसके पीछे का
आधार हर बीमार से लड़ने के लिए महत्वपूर्ण है।
- हिम्मत हमेशा एंटीबॉडीज बढ़ाती है।
इम्युनिटी immunity
एक रिपोर्ट के अनुसार शरीर में
सांस लेने, भोजन पानी, आदि कारणों से
करोड़ो की संख्या में वायरस पहुंचते हैं।
उनमें से ज्यादातर स्वास्थ्य के लिए घातक नही होते।
जो नुकसानदेह होते हैं उनसे शरीर लड़ता रहता है।
मानव शरीर अधिकांश सूक्ष्म जीवों से लड़ने में सक्षम है।
इसे यूं समझा जा सकता है कि, कोई वैक्सीन लेने पर
रोग के खिलाफ एंटीबॉडी तो शरीर ही बनाता है। जब
वैक्सीन द्वारा किसी रोग के मृत या कमजोर वायरस
शरीर को दिए जाते हैं।
इसलिए, अपने इम्यून सिस्टम को मजबूत कीजिए।
इससे कई संक्रमणों से आसानी से बचा जा सकता है।
प्रातः खुली हवा लीजिए। कुछ देर टहलिये।
जितना हो सके मौसमी फल सब्जी का उपयोग करें। संभव हो तो कुछ देर धूप जरूर लें।
ज्यादा समय तक समाचार न देखे, पढ़े।
परिजनों, मित्रों से बात करे।पसंदीदा फिल्म देखें, संगीत सुनें। इम्यूनिटी जरूर मजबूत होगी।
पक्षियों को दाना
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